Last Days of Prophet Muhammad in hindi



last days of prophet muhammad

प्यारे नबी ( पैगंबर मोहम्मद ) की हालत गिरती गई। बुख़ार कभी
घट जाता, कभी बढ़ जाता। जब तक पैरों में दम रहा और चलने-फिरने
की ताक़त रही, आप ( पैगंबर मोहम्मद ) मस्जिद में जाते रहे और
मुसलमानों की इमामत करते रहे। सबसे आख़िरी नमाज़ जो आप
( पैगंबर मोहम्मद ) ने पढ़ाई वह मग़रिब की नमाज़ थी। इशा का
वक़्त हुआ तो आप ( पैगंबर मोहम्मद ) ने पूछा- “नमाज़ हो चुकी?"
साथियों ने कहा, “बस आप का इन्तिज़ार है।"




आपने बर्तन में पानी भरवाया और गस्ल किया। उठना चाहा तो बेहोश
हो गए। कुछ दर क बाद होश आया तो पूछा, “नमाज़ हो चकी?”
साथियों ने फिर कहा“हुजूर का इन्तिज़ार है।" आप फिर नहाए और
उठना चाहा। चकी?" फिर वही जवाब मिला, “आपका इन्तिज़ार है।" आपके शरीर पर पानी डाला गया। उठने का इरादा किया तो फिर बेहोश हो गए। इस बार होश आया तो फ़रमाया
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अबू-बक्र (रजि.) से कहो, वे नमाज़ पढ़ाएँ।"
हज़रत आइशा (रजि.) ने कहा,
"ऐ अल्लाह के रसूल ! उनकी आवाज़ बहुत धीमी है। क़ुरआन
पढ़ते हैं तो रोते हैं। लोग उनकी आवाज़ सुन नहीं सकेंगे।"


प्यारे नबी (सल्ल.) ने फ़रमाया “उन्हीं से कहो नमाज़ पढ़ाएँ।" हज़रत
आइशा (रजि.) ने दोबारा वही बात दोहराई। प्यारे नबी ( पैगंबर
मोहम्मद) तकलीफ़ से बेचैन थे। गुस्से से आवाज़ काफ़ी बुलन्द हो गई।
फ़रमाया, “कहो अबू-बक्र से, वही नमाज़ पढ़ाएँगे।" हज़रत अब-बक्र
(रजि.) ने आदेश का पालन किया और आख़िर तक वे ही नमाज़
पढ़ाते रहे।

इन्तिक़ाल से चार दिन पहले कुछ सुकून हुआ। जुहर का वक़्त था।
सात मश्क पानी से आप ( पैगंबर मोहम्मद ) ने गुस्ल किया। फिर
कपड़े पहने। सिर पर पट्टी बाँधी और फ़ज़्ल-बिन-अब्बास (रजि.)
और सौबान (रजि.) के सहारे मस्जिद गए। नमाज़ हो रही थी।


हज़रत अबू-बक्रः (रजि.) इमाम थे। आहट पाकर उन्होंने पीछे हटना
चाहा। लेकिन आपने रोक दिया और उनके पहलू में जाकर बैठ गए।
नमाज़ के बाद आप (  पैगंबर मोहम्मद ) ने छोटी सी तक़रीर की,
“मुसलमानो! मुझे पता चला है, तुम अपने नबी की मौत से घबरा रहे
हो। आखिर ऐसा क्यों? मुझसे पहले जितने नबी आए, सबको मौत
आई। आखिर मैं भी तो उन ही जैसा एक नबी हूँ।" सुन लो! जिन
लोगों ने पहले हिजरत की है। उनके साथ हमेशा अच्छा बर्ताव करना। 

महाजिर भी आपस में अच्छा सुलूक करें। और हाँ, अनसार के साथ
भी अच्छा सलूक करना। जो अनसार भलाई करें, उनके साथ भलाई
करना। जो ग़लती करें उन्हें माफ़ कर देना।" फिर आप ( पैगंबर
मोहम्मद) ने फ़रमाया

"आम मुसलमान बढ़ते जाएँगे। मगर अनसार उसी तरह कम होकर रह जाएंगे, जैसे खाने में नमक। मुसलमानो! वे अपना काम कर चुके। जब तमको आना काम करना है। वे मेरे शरीर में मेदे (आमाशय) के...



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