Hazrat Ishmael Ki Puri Kahani in Hindi

 


अस्सलामवालेकुम दोस्तों आज मैं आपको कहानी सुनाऊंगा पैगंबर इस्माइल अलैहिस्सलाम की मैं आशा करता हूं कि आपको यह कहानी भी पिछली कहानी की तरह बहुत पसंद आएगी तो बिना किसी देरी के चली शुरू करते हैं किस्सा चलिए शुरू करते हैं पैगंबर इस्माइल की कहानी !

 

अल्लाह पाक ने अपना संदेश लोगों तक पहुंचाने के लिए इब्राहिम को अपना पैगंबर चुना उन्होंने अलग-अलग क्षेत्रों का दौरा किया और लोगों को अल्लाह का संदेश सुनाया उन्हें मिली सारी अच्छाइयों वह अभिनंदन करते थे

लेकिन एक बात जो उन्हें परेशान करे रखती थी वह है संतान का ना होना उनकी पत्नी सारा भी अब बूढ़ी हो चुकी थी संतान होने की उन्हें कोई उम्मीद नहीं थी ! एक दिन उनके दिमाग में एक विचार आया उन्होंने इब्राहिम अली सलाम को कहा कि आप हाजरा से शादी कर लीजिए पैगंबर इब्राहिम ने पहले तो इंकार कर दिया लेकिन क्योंकि वह अपनी पत्नी को चाहते थे और अल्लाह पाक का हुक्म भी गया था तो वह मान गए सहारा ने एक संतान होने की दुआ मांगी और जल्द ही हाजरा के संतान हो गई और एक बच्चे की मां बन गई पैगंबर ने उस बच्चे का नाम इस्माइल रखा पैगंबर यह सोचते बहुत खुश हुए की वह बाप बन चुके हैं लेकिन उनकी यह खुशी ज्यादा दिन तक नहीं रही और

अल्लाह पाक ने उन्हें एक आदेश दिया जिसको सुनने के बाद पैगंबर इब्राहिम ने हाजरा को तैयार होने के लिए कहा और सफर पर चलने के लिए कहा क्योंकि हाजरा एक नेक बीवी थी तो उन्होंने कोई सवाल जवाब नहीं किया क्योंकि वह जानते थे कि उनके पति पैगंबर इब्राहिम हमेशा उनका साथ देंगे फिर एक लंबे सफर के बाद वह एक जगह पहुंचे जहां पर पैगंबर ने अपनी बीवी और अपने बच्चे को वहां छोड़ दिया और वहां से वापस आने लगे जब वह वहां से वापस रहे थे तो उनकी बीवी हाजरा ने पूछा आप हमें कहां छोड़ कर जा रहे हैं पर पैगंबर ने कोई जवाब नहीं दिया और चलते चले गए फिर हाजरा ने पूछा क्या यह अल्लाह का आदेश है तो पैगंबर इब्राहिम ने कहा हां इसके बाद हजरत हाजरा समझ गई कि अगर यह अल्लाह का आदेश है तो अल्लाह ही हमें बचाएगा फिर पैगंबर इब्राहिम वहां से चले गए !

 

जहां पर पैगंबर इब्राहिम ने अपनी पत्नी को छोड़ा था वह जगह अल-मरवा और अल-सफ़ा पहाड़ी के पास थी

अब हजरत हाजरा के पास खाना और पानी के लिए ज्यादा सामान नहीं बचा था जिसको खत्म होने में लगभग दो और वह खाना और पानी दोनों खत्म हो गए फिर हाजरा अपने बेटे इस्माइल को चुप कराने की कोशिश करती लेकिन वह चुप नहीं होता ! बेटा इस्माइल प्यास की वजह से तड़प रहा था और जमीन में अपने पैर रगड़ने लगा था हजरत हाजरा देख ना सकी और पानी की तलाश में मरवा और सफा पहाड़ी पर 7 बार चक्कर लगाए वह ऐसा करके बहुत थक चुकी थी लेकिन उनको पानी की एक बूंद ना दिखी !

 

जब हजरत हाजरा पहाड़ी से वापस लौटी तो हजरत हाजरा ने देखा कि जहां पर उनका बेटा अपने पैर रगड़ रहा था उस जगह से पानी का फव्वारा फूट पड़ा हजरत हाजरा जल्दी-जल्दी अपने बेटे के पास पहुंची और उस निकलते हुए पानी के चारों ओर पत्थर लगा दिए ताकि वह पानी बना सके और बर्बाद ना हो लेकिन वह पानी बंद ना होता और बहता रहता और हजरत हाजरा उसको रोकने के लिए कह दी Zam-Zam जानी रुक जा थम जा

उन्होंने जी भर के पानी पिया और अपने बेटे को पिलाया !

 

फिर एक दिन एक काफिले का वहां से गुजर हुआ क्योंकि अल-मरवा पहाड़ी  का रास्ता दो शहरों को जोड़ने वाला एक रास्ता था काफिले के लोगों ने देखा कि अल-मरवा पहाड़ी के ऊपर बहुत सारे पक्षी उड़ रहे हैं उन काफिले वालों को यह पता था कि अगर कहीं पर इतने ज्यादा पक्षी आसमान में उड़ रहे हैं तो आसपास कहीं तो पानी जरूर होगा और उन्होंने जमजम का पानी ढूंढ लिया इसको ढूंढने के बाद उन्होंने हजरत हाजरा से पूछा क्या हम यहां पर रह सकते हैं तो हजरत हाजरा ने कहा जरूर और कुछ लोग वहां पर बस गए ऐसे करते करते वह शहर बन गया और मक्का शहर नाम से जाना जाने लगा !

 

इसी बीच पैगंबर इस्माइल बड़े हो गए और उन्होंने आने वाली व्यापारियों से अरबी भाषा सीख ली वहां के लोग पैगंबर इस्माइल को बहुत सम्मान देते क्योंकि वह बहुत ही होशियार थे मैं अपने पिता के बारे में सोचते रहते थे कि मेरे पिता एक दिन जरूर आएंगे फिर पैगंबर इस्माइल ने वहीं की एक लड़की से शादी कर ली और उसके साथ अपना जीवन जीने लगे !

 

फिर पैगंबर स्माइल को अपने बेटे की याद सताने लगी और वह अपने बेटे के बारे में सोचते रहते थे कि वह कैसा होगा और हजरत हाजरा कैसी होगी ! फिर अल्लाह के हुक्म से पैगंबर इब्राहिम अपने बच्चे और बीवी से मिलने के लिए गए जब पैगंबर इब्राहिम अल-मरवा पहाड़ी पर पहुंचे तो पैगंबर इब्राहिम ने देखा कि वहां तो शहर बन चुका है और पैगंबर इब्राहिम ने अल्लाह का शुक्र अदा किया क्योंकि पिछली बार जब वह अपने बीवी और बच्चे को यहां पर छोड़ कर गए थे तो यहां पर कुछ भी नहीं था यहां तक कि जानवर भी नहीं था ! फिर पैगंबर इब्राहिम ने अपनी बीवी हाजरा और अपने बेटे इस्माइल के बारे में पूछा लोगों ने कहा कि कुछ साल पहले ही हजरत हाजरा की मौत हो चुकी है पैगंबर इब्राहिम में जब यह सब सुना तो वह बहुत उदास हो गए लेकिन लोगों ने बताया कि उनका बेटा इस्माइल अभी तक जिंदा है उसकी शादी भी हो गई है यह सुनने के बाद पैगंबर इब्राहिम खुश हो गए जैसे ही पैगंबर इस्माइल को यह खबर पता चली की उनके पिता उनसे मिलने आए हैं तो वह बहुत खुश हो गए और अपने पिता से मिलने के लिए उनकी तरफ दौड़े और जैसे ही पैगंबर इस्माइल ने अपने पिता पैगंबर इब्राहिम को देखा तो वे उनके गले लग गए और वह रोने लगे पिता और बेटे के लिए यह बहुत खुशी का वक्त था परंतु यह खुशी ज्यादा दिन तक नहीं रही !

एक दिन अल्लाह पाक ने पैगंबर इब्राहिम की परीक्षा लेने के बारे में सोचा ! एक रात जब पैगंबर इब्राहिम सो रहे थे तो उन्होंने अपने सपने में देखा कि वह अपने बेटे की कुर्बानी दे रहे हैं लेकिन पैगंबर ने इस पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया लेकिन अगली रात जब उन्हें वही सपना दोबारा आया तो वह समझ गए कि अल्लाह पाक उनके बेटे इस्माइल की कुर्बानी मांग रहे हैं इस सपने के बारे में पैगंबर इब्राहिम ने अपने बेटे को बताया तो उनका बेटा पूरी बात समझ गया और उनके बेटे ने कहा पिताजी आप वैसा ही करिए जैसा अल्लाह ने कहा है इसी वजह से पैगंबर इब्राहिम अगले दिन अपने बेटे को लेकर अराफात पहाड़ी पर लेकर चले गए वह अपने साथ एक धारदार चाकू और रस्सी भी ले गए थे ! पहाड़ के ऊपर पहुंचने पर उनके बेटे ने अपने पिता इब्राहिम से कहा कि मेरे हाथ और पैर दीजिए ताकि कुर्बानी के समय कोई भी दिक्कत ना आए पैगंबर इब्राहिम यह बात मान गए और पैगंबर इस्माइल के हाथ और पैर बांध दिए और फिर पैगंबर ने अपनी आंखों पर पट्टी बांधी ली ताकि करते वक्त उनके बेटे इस्माइल का चेहरा उनके सामने ना जाए क्योंकि वह उन्हें तड़पता हुआ नहीं देखना चाहते थे !

 

पैगंबर इब्राहिम ने कुर्बानी करने के लिए जैसे ही अपना धारदार चाकू ऊपर उठाया तभी पैगंबर इब्राहिम को एक जोरदार आवाज सुनाई दी की वह कुर्बानी ना दें यह सिर्फ एक परीक्षार्थी पैगंबर को बहुत सुकून मिला कि उनका बेटा अब जिंदा रहेगा उन्होंने एक दूसरे को अपने गले लगा लिया और रोने लगे ! पैगंबर इस्माइल अपने पिता के साथ अल्लाह का संदेश सुनाते उन्होंने लोगों को बताया और इस्लाम की तरफ ले जाने लगे !

 

फिर एक दिन पैगंबर इब्राहिम को इबादतगाह बनाने का हुक्म आया पैगंबर इब्राहिम ने अपने बेटे से कहा कि अल्लाह पाक उनसे काबा बनवाना चाहते हैं इस्माइल ने जवाब दिया कि आप वैसा ही कीजिए जैसे अल्लाह चाहते हैं जल्दी उन्होंने काबा की बुनियाद रखनी शुरू कर दी पैगंबर स्माइल पत्थर लाने का काम करते हैं और पैगंबर इब्राहिम रोको दीवारों में चुनते ! ऐसा कहते कहते हैं जब काबा की दीवारे काशी बड़ी हो गई तो पैगंबर इब्राहिम उसकी ऊंचाई तक नहीं पहुंच पा रहे थे जिसके कारण पैगंबर इस्माइल पैगंबर इब्राहिम के लिए एक पत्थर लेने गए पढ़कर पैगंबर इब्राहिम ने दीवार चुनने का काम दोबारा शुरू कर दिया वह पत्थर आज भी मक्का में काबा के पास मौजूद है उसे मकाम इब्राहिम कहा जाता है जल्दी इमारत बनकर तैयार हो गए लेकिन वहां कोने में एक जगह खाली रह गई थी उस जगह पर पत्थर रखने के लिए पैगंबर इस्माइल पत्थर तलाश करने निकल जाते हैं अभी इसी वक्त अल्लाह की तरफ से भेजा हुआ एक फरिश्ता आता है और वह पैगंबर इब्राहिम को एक पत्थर पकड़ आता है जो सफेद था और कहता है कि इस पत्थर को इस खाली जगह में लगा देना ऐसा अल्लाह पाक में हुकुम दिया है पैगंबर इब्राहिम इस बात को मान जाते हैं और उस सफेद पत्थर को उस खाली जगह लगा देते हैं वह पत्थर जन्नत से आया हुआ पत्थर था वह सफेद रंग का था लेकिन दुनिया की बुराइयों के कारण वह पत्थर काला पड़ गया आज उस पत्थर को हजरे अस्वद के नाम से जाना जाता है वह पत्थर आज भी काबा में लगा हुआ है !

इसके बाद पैगंबर इब्राहिम और पैगंबर इस्माइल ने दुआ मांगी कि अल्लाह हमारे इस काम को कबूल करें !

 

 



 

 

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